South Korea’s president declared a state of emergency | राष्ट्रपति ने साउथ कोरिया में इमरजेंसी लगाई: कहा- विपक्ष नॉर्थ कोरिया के इशारे पर सरकार अस्थिर करना चाह रहा, कई विपक्षी नेता हिरासत में


19 घंटे पहले

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यून सुक योल ने साल 2022 में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति का पदभार संभाला था। - Dainik Bhaskar

यून सुक योल ने साल 2022 में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति का पदभार संभाला था।

दक्षिण कोरिया में 3 दिसंबर को राष्ट्रपति यून सुक योल ने इमरजेंसी मार्शल लॉ का ऐलान किया। राष्ट्रपति ने विपक्ष पर संसद को नियंत्रित करने, उत्तर कोरिया के साथ सहानुभूति रखने और सरकार गिराने वाली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।

राष्ट्रपति यून ने टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में यह घोषणा की। इसके साथ ही दक्षिण कोरिया में जारी राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। यून की पीपुल्स पावर पार्टी मई 2022 से सत्ता में हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है। 1980 के बाद यह पहली बार है, जब दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ घोषित किया गया है।

आर्मी ने नेशनल असेंबली को अपने कब्जे में ले लिया है।

आर्मी ने नेशनल असेंबली को अपने कब्जे में ले लिया है।

देश में मॉर्शल लॉ ऐसे समय में लगाया गया है, जब संसद में सरकार और विपक्षी दल के बीच बजट विधेयक को लेकर मतभेद है। राजधानी सियोल में सड़क से लेकर संसद तक में प्रदर्शन हुआ। संसद में इस फैसले के खिलाफ मतदान हुआ है।

संसद के ऊपर हेलिकॉप्टर तैनात कर दिए गए हैं। सेना ने कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया है। मार्शल लॉ लागू करने के विरोध में दक्षिण कोरियाई संसद के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।

नेशनल असेंबली में विपक्षी सांसदों को रोकते सुरक्षा बल।

नेशनल असेंबली में विपक्षी सांसदों को रोकते सुरक्षा बल।

मार्शल लॉ घोषित होने के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया।

मार्शल लॉ घोषित होने के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया।

मार्शल लॉ के बाद रैलियां बैन, प्रसारण पर रोक

  • नेशनल असेंबली, स्थानीय परिषदों और राजनीतिक दलों, राजनीतिक संघों, रैलियों और प्रदर्शनों सहित सभी राजनीतिक गतिविधियां बैन होंगी।
  • फेक न्यूज, पब्लिक ओपिनियन और झूठे प्रचार पर रोक रहेगी।
  • सभी मीडिया और प्रकाशन मार्शल लॉ कमांड के नियंत्रण के अधीन होंगी।
  • हड़ताल, काम रोकने पर कार्रवाई की जाएगी।
  • प्रशिक्षु डॉक्टरों सहित सभी चिकित्सा कर्मी, जो हड़ताल पर हैं या चिकित्सा क्षेत्र छोड़ चुके हैं, उन्हें 48 घंटे के भीतर अपनी नौकरी पर लौटना होगा। ईमानदारी से काम करना होगा। उल्लंघन करने वालों को मार्शल लॉ के अनुसार सजा दी जाएगी।



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